Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.202.25: जब भगवान शिव युद्ध में क्रोधित होते हैं, तब उनकी गंध मात्र से ही शत्रु काँप उठते हैं, मूर्छित हो जाते हैं और वे अधमरे होकर गिर पड़ते हैं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.202.25 
गन्धेनापि हि संग्रामे तस्य क्रुद्धस्य शत्रव:।
विसंज्ञा हतभूयिष्ठा वेपन्ति च पतन्ति च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान शिव युद्ध में क्रोधित होते हैं, तब उनकी गंध मात्र से ही शत्रु काँप उठते हैं, मूर्छित हो जाते हैं और वे अधमरे होकर गिर पड़ते हैं॥ 25॥
 
When Lord Shiva becomes angry in a battle, even his smell makes the enemies tremble and faint and they fall down half dead.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)