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mahabharat 7.202.24: जब वे स्वयं आकर हमारे सामने खड़े हो जाते हैं, तो कोई भी वहाँ रुकने का साहस नहीं कर सकता। तीनों लोकों में कोई भी प्राणी उनकी बराबरी नहीं कर सकता। 24.   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.24 
स्थातुमुत्सहते कश्चिन्न तस्मिन्नग्रत: स्थिते।
न हि भूतं समं तेन त्रिषु लोकेषु विद्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जब वे स्वयं आकर हमारे सामने खड़े हो जाते हैं, तो कोई भी वहाँ रुकने का साहस नहीं कर सकता। तीनों लोकों में कोई भी प्राणी उनकी बराबरी नहीं कर सकता। 24.
 
When He Himself comes and stands before us, no one can dare to stay there. There is no creature in the three worlds that can equal Him. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)