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mahabharat 7.202.2-3: संजय बोले - भरतश्रेष्ठ! जब धृष्टद्युम्न द्वारा महारथी द्रोणाचार्य की मृत्यु हो जाने पर सब कौरव भाग गए, उस समय कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपनी विजय में सहायक एक अत्यन्त आश्चर्यजनक घटना देखकर सहसा वहाँ आये हुए वेदव्यास जी से उसके विषय में पूछा।   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  7.202.2-3 
संजय उवाच
तस्मिन्नतिरथे द्रोणे निहते पार्षतेन वै।
कौरवेषु च भग्नेषु कुन्तीपुत्रो धनंजय:॥ २॥
दृष्ट्वा सुमहदाश्चर्यमात्मनो विजयावहम्।
यदृच्छयाऽऽगतं व्यासं पप्रच्छ भरतर्षभ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय बोले - भरतश्रेष्ठ! जब धृष्टद्युम्न द्वारा महारथी द्रोणाचार्य की मृत्यु हो जाने पर सब कौरव भाग गए, उस समय कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपनी विजय में सहायक एक अत्यन्त आश्चर्यजनक घटना देखकर सहसा वहाँ आये हुए वेदव्यास जी से उसके विषय में पूछा।
 
Sanjay said – Bharatshrestha! When all the Kauravas ran away after the death of the great warrior Dronacharya by Dhrishtadyumna, at that time Kunti's son Arjun, seeing a very surprising incident that led to his victory, suddenly asked Ved Vyas ji who had come there about it. 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)