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mahabharat 7.202.150: जो मनुष्य भगवान शंकर के ब्रह्मा, विष्णु, महेश और निर्गुण निराकार चतुर्विध स्वरूप का वर्णन करने वाले इस स्तोत्र का सदैव श्रवण करता है, वह समस्त शत्रुओं को जीतकर रुद्रलोक में प्रतिष्ठित होता है ॥150॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.150 
चतुर्विधमिदं स्तोत्रं य: शृणोति नर: सदा।
विजित्य शत्रून् सर्वान् स रुद्रलोके महीयते॥ १५०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य भगवान शंकर के ब्रह्मा, विष्णु, महेश और निर्गुण निराकार चतुर्विध स्वरूप का वर्णन करने वाले इस स्तोत्र का सदैव श्रवण करता है, वह समस्त शत्रुओं को जीतकर रुद्रलोक में प्रतिष्ठित होता है ॥150॥
 
The person who always listens to this stotra which enunciates the fourfold form of Lord Shankar as Brahma, Vishnu, Mahesh and Nirguna formless, he wins all the enemies and gets established in Rudralok. 150॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)