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mahabharat 7.202.146-147: हे भोले अर्जुन! जब तुमने सिन्धुराज का वध करने की प्रतिज्ञा की थी, तब इन्हीं भगवान् श्रीकृष्ण ने तुम्हें गिरिराज शिखर पर स्वप्न में दर्शन दिए थे। ये भगवान् शंकर ही युद्ध में तुम्हारा नेतृत्व कर रहे हैं। इन्होंने ही तुम्हें वे दिव्यास्त्र प्रदान किए हैं जिनसे तुमने राक्षसों का वध किया है। 146-147   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.146-147 
सिन्धुराजवधार्थाय प्रतिज्ञाते त्वयानघ।
कृष्णेन दर्शित: स्वप्ने यस्तु शैलेन्द्रमूर्धनि॥ १४६॥
एष वै भगवान् देव: संग्रामे याति तेऽग्रत:।
येन दत्तानि तेऽस्त्राणि यैस्त्वया दानवा हता:॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
हे भोले अर्जुन! जब तुमने सिन्धुराज का वध करने की प्रतिज्ञा की थी, तब इन्हीं भगवान् श्रीकृष्ण ने तुम्हें गिरिराज शिखर पर स्वप्न में दर्शन दिए थे। ये भगवान् शंकर ही युद्ध में तुम्हारा नेतृत्व कर रहे हैं। इन्होंने ही तुम्हें वे दिव्यास्त्र प्रदान किए हैं जिनसे तुमने राक्षसों का वध किया है। 146-147
 
Innocent Arjun! When you had vowed to kill the king of Sindhu, the same Lord Krishna had shown you in a dream on the peak of Giriraj. This same Lord Shankar is leading you in the battle. He is the one who gave you those divine weapons with which you have killed the demons. 146-147.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)