Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.202.134: इस लोक में प्रकाशित होने वाली सूर्य और चन्द्रमा की किरणें भगवान त्रिलोचन के केश कहलाती हैं। वे व्योम (आकाश) में प्रकाशित होती हैं; इसीलिए उनका नाम 'व्योमकेश' है ॥134॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  7.202.134 
सूर्याचन्द्रमसोर्लोके प्रकाशन्ते रुचश्च या:।
ता: केशसंज्ञितास्त्र्यक्षे व्योमकेशस्तत: स्मृत:॥ १३४॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में प्रकाशित होने वाली सूर्य और चन्द्रमा की किरणें भगवान त्रिलोचन के केश कहलाती हैं। वे व्योम (आकाश) में प्रकाशित होती हैं; इसीलिए उनका नाम 'व्योमकेश' है ॥134॥
 
The rays of the sun and moon that shine in this world are said to be the hair of Lord Trilochan. They are published in Vyoma (sky); That's why his name is 'Vyomkesh'. 134॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)