Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.202.130: वे भगवान भुवनेश्वर अम्बस्वरूपा आकाश, जल और पृथ्वी तीनों देवियों को धारण करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं, इसलिए वे त्र्यम्बक कहलाते हैं ॥130॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  7.202.130 
तिस्रो देवीर्यदा चैव भजते भुवनेश्वर:।
द्यामप: पृथिवीं चैव त्र्यम्बकश्च तत: स्मृत:॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
वे भगवान भुवनेश्वर अम्बस्वरूपा आकाश, जल और पृथ्वी तीनों देवियों को धारण करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं, इसलिए वे त्र्यम्बक कहलाते हैं ॥130॥
 
That Lord Bhuvaneshwar adopts and protects the three goddesses in the form of Ambaswarupa, sky, water and earth, hence he is called Trimbak. 130॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)