Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.202.128: यद्यपि उनकी सब ओर दृष्टि है, फिर भी उनकी एक अनोखी अग्निमय आँख है, जो सदैव क्रोध से प्रज्वलित रहती है; क्योंकि वे समस्त लोकों में स्थित हैं, इसलिए उन्हें 'सर्व' कहा गया है। 128. | mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकाक्षो जाज्वलन्नास्ते सर्वतोऽक्षिमयोऽपि वा।
क्रोधाद् यश्चाविशल्लोकांस्तस्मात् सर्व इति स्मृत:॥ १२८॥
अनुवाद
यद्यपि उनकी सब ओर दृष्टि है, फिर भी उनकी एक अनोखी अग्निमय आँख है, जो सदैव क्रोध से प्रज्वलित रहती है; क्योंकि वे समस्त लोकों में स्थित हैं, इसलिए उन्हें 'सर्व' कहा गया है। 128.
Although He has eyes on all sides, He has a unique fiery eye which is always aflame with anger; because He is present in all the worlds, He is called 'Sarva'. 128.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥