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mahabharat 7.202.125: ऋषि, देवता, गंधर्व और अप्सराएँ ऊपरी लोक में स्थित उनके लिंग-विग्रह (प्रतीक) की पूजा करते हैं। 125.   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.125 
ऋषयश्चैव देवाश्च गन्धर्वाप्सरसस्तथा।
लिङ्गमस्यार्चयन्ति स्म तच्चाप्यूर्ध्वं समास्थितम्॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
ऋषि, देवता, गंधर्व और अप्सराएँ ऊपरी लोक में स्थित उनके लिंग-विग्रह (प्रतीक) की पूजा करते हैं। 125.
 
Rishis, demigods, Gandharvas and Apsaras worship his Linga-vigraha (symbol) situated in the upper world. 125.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)