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mahabharat 7.202.123: वे सदैव पशुओं की देखभाल करते हैं, उनके साथ खेलते हैं और उन पशुओं के स्वामी हैं; इसलिए उन्हें 'पशुपति' कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.123 
सर्वथा यत् पशून् पाति तैश्च यद् रमते पुन:।
तेषामधिपतिर्यच्च तस्मात् पशुपति: स्मृत:॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
वे सदैव पशुओं की देखभाल करते हैं, उनके साथ खेलते हैं और उन पशुओं के स्वामी हैं; इसलिए उन्हें 'पशुपति' कहा जाता है।
 
He always takes care of the animals and plays with them and is the lord of those animals; therefore he is called 'Pashupati'. 123.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)