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mahabharat 7.202.115: महाभूतों के ईश्वर होने के कारण वे महेश्वर कहलाते हैं। वे अनेक रूपों में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं ॥115॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.115 
महेश्वरश्च महतां भूतानामीश्वरश्च स:।
बहुभिर्बहुधा रूपैर्विश्वं व्याप्नोति वै जगत्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
महाभूतों के ईश्वर होने के कारण वे महेश्वर कहलाते हैं। वे अनेक रूपों में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं ॥115॥
 
Being the God of the great elements, He is known as Maheshwar. He is spread throughout the universe in various forms. ॥ 115॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)