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mahabharat 7.202.112-113h: जब वे प्रसन्न होते हैं, तब मनुष्यों को दीर्घायु, आरोग्य, समृद्धि, धन और इच्छित वस्तुएँ प्रचुर मात्रा में प्रदान करते हैं। और जब वे क्रोधित होते हैं, तब उन सबको नष्ट कर देते हैं। ॥112 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 112-113h
 
 
श्लोक  7.202.112-113h 
आयुरारोग्यमैश्वर्यं वित्तं कामांश्च पुष्कलान्॥ ११२॥
स ददाति मनुष्येभ्य: स चैवाक्षिपते पुन:।
 
 
अनुवाद
जब वे प्रसन्न होते हैं, तब मनुष्यों को दीर्घायु, आरोग्य, समृद्धि, धन और इच्छित वस्तुएँ प्रचुर मात्रा में प्रदान करते हैं। और जब वे क्रोधित होते हैं, तब उन सबको नष्ट कर देते हैं। ॥112 1/2॥
 
When He is pleased, He gives longevity, health, prosperity, wealth and desired objects to men in abundance. And when He is angry, He destroys them all. ॥ 112 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)