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mahabharat 7.202.106: सब देवता सदैव उनकी स्तुति करते हैं। महादेवजी एक हैं, फिर भी अनेक हैं। वे सैकड़ों, हजारों और लाखों रूपों में विराजमान हैं॥106॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.106 
सर्वदेवै: स्तुतो देव: सैकधा बहुधा च स:।
शतधा सहस्रधा चैव भूय: शतसहस्रधा॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
सब देवता सदैव उनकी स्तुति करते हैं। महादेवजी एक हैं, फिर भी अनेक हैं। वे सैकड़ों, हजारों और लाखों रूपों में विराजमान हैं॥106॥
 
All the gods always praise him. Mahadevji is one but still many. He resides in hundreds, thousands and lakhs of forms.॥106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)