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mahabharat 7.202.103: वे ही जगत हैं, वे ही मेघ हैं और वे ही सनातन महादेव हैं। वे ही चन्द्रमा, ईशान, सूर्य और वरुण भी हैं॥103॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.103 
स भव: स च पर्जन्यो महादेव: सनातन:।
स चन्द्रमा: स चेशान: स सूर्यो वरुणश्च स:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
वे ही जगत हैं, वे ही मेघ हैं और वे ही सनातन महादेव हैं। वे ही चन्द्रमा, ईशान, सूर्य और वरुण भी हैं॥103॥
 
He is the world, he is the clouds and he is the eternal Mahadev. He is the moon, Ishan, the sun and Varuna too.॥103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)