Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.201.d2: श्रुति और महर्षि अपने-अपने सिद्धांतों की ही चर्चा करते हैं, इसलिए सभी जीव अपने मन से भी उस जगदीश्वर को जीतने में असमर्थ हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  7.201.d2 
व्याकुर्वते यस्य तत्त्वं श्रुतयो मुनयश्च ह।
अतोऽजय्य: सर्वभूतैर्मनसापि जगत्पति:॥)
 
 
अनुवाद
श्रुति और महर्षि अपने-अपने सिद्धांतों की ही चर्चा करते हैं, इसलिए सभी जीव अपने मन से भी उस जगदीश्वर को जीतने में असमर्थ हैं।
 
The Shrutis and the Maharishis discuss their principles only. Therefore, all living beings are unable to conquer that Jagdishwar even with their mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)