vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना
»
श्लोक 96
श्लोक
7.201.96
सर्वभूतभवं ज्ञात्वा लिङ्गमर्चति य: प्रभो:।
तस्मिन्नभ्यधिकां प्रीतिं करोति वृषभध्वज:॥ ९६॥
अनुवाद
जो मनुष्य समस्त प्राणियों का मूलस्थान जानकर भगवान शिव के लिंग की पूजा करता है, भगवान शिव उसे बहुत प्रिय हैं ॥96॥
Lord Shiva loves the one who worships the Lingam of Lord Shiva knowing it to be the place of origin of all creatures. ॥ 96॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×