स एष रुद्रभक्तश्च केशवो रुद्रसम्भव:।
कृष्ण एव हि यष्टव्यो यज्ञैश्चैव सनातन:॥ ९५॥
अनुवाद
ये श्रीकृष्ण भगवान शंकर के भक्त हैं और उन्हीं से प्रकट हुए हैं; अतः यज्ञों द्वारा सनातन पुरुष श्रीकृष्ण की ही पूजा करनी चाहिए ॥95॥
This Shri Krishna is a devotee of Lord Shankar and has appeared from him; Therefore, only the eternal man Shri Krishna should be worshiped through yagyas. 95॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥