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mahabharat 7.201.83-84: मेरी कृपा से कोई भी अस्त्र, वज्र, अग्नि, वायु, गीली या सूखी वस्तुएँ, या स्थावर या जंगम प्राणी तुम्हें किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुँचा सकते। जब तुम युद्धभूमि में पहुँचोगे, तब मुझसे भी अधिक शक्तिशाली हो जाओगे ॥ 83-84॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 83-84
 
 
श्लोक  7.201.83-84 
न शस्त्रेण न वज्रेण नाग्निना न च वायुना।
न चार्द्रेण न शुष्केण त्रसेन स्थावरेण च॥ ८३॥
कश्चित् तव रुजां कर्ता मत्प्रसादात् कथंचन।
अपि वै समरं गत्वा भविष्यसि ममाधिक:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
मेरी कृपा से कोई भी अस्त्र, वज्र, अग्नि, वायु, गीली या सूखी वस्तुएँ, या स्थावर या जंगम प्राणी तुम्हें किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुँचा सकते। जब तुम युद्धभूमि में पहुँचोगे, तब मुझसे भी अधिक शक्तिशाली हो जाओगे ॥ 83-84॥
 
No weapon, thunderbolt, fire, wind, wet or dry objects, or mobile or immobile creatures can harm you in any way by my grace. When you reach the battlefield, you will become even more powerful than me. ॥ 83-84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)