श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 81-82
 
 
श्लोक  7.201.81-82 
न च त्वां प्रसहिष्यन्ति देवासुरमहोरगा:।
न पिशाचा न गन्धर्वा न यक्षा न च राक्षसा:॥ ८१॥
न सुपर्णास्तथा नागा न च विश्वे वियोनिजा:।
न कश्चित् त्वां च देवोऽपि समरेषु विजेष्यति॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
देवता, दानव, बड़े-बड़े नाग, भूत, गंधर्व, यक्ष, राक्षस, सुपर्ण, सर्प और समस्त पशु (सिंह, व्याघ्र आदि) भी तुम्हारा वेग सहन नहीं कर सकेंगे। यहाँ तक कि कोई भी देवता तुम्हें युद्धभूमि में पराजित नहीं कर सकेगा। ॥81-82॥
 
Gods, demons, big serpents, ghosts, Gandharvas, Yakshas, ​​demons, Suparnas, serpents and all the animals (lions, tigers etc.) will not be able to bear your speed. Even no god will be able to defeat you in the battlefield. ॥ 81-82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)