Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.201.75: जैसे जल की बूँदें जल से पृथक् होकर, क्षीण होकर, कालान्तर में पुनः जल में मिल जाती हैं और उसी में एक हो जाती हैं, वैसे ही समस्त प्राणी आपसे उत्पन्न होकर आपमें ही लीन हो जाते हैं। ऐसा जानकर विद्वान् पुरुष आपके ही सान्निध्य को प्राप्त होता है ॥ 75॥ | mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अद्भ्य: स्तोका यान्ति यथा पृथक्त्वं
ताभिश्चैक्यं संक्षये यान्ति भूय:।
एवं विद्वान् प्रभवं चाप्ययं च
मत्वा भूतानां तव सायुज्यमेति॥ ७५॥
अनुवाद
जैसे जल की बूँदें जल से पृथक् होकर, क्षीण होकर, कालान्तर में पुनः जल में मिल जाती हैं और उसी में एक हो जाती हैं, वैसे ही समस्त प्राणी आपसे उत्पन्न होकर आपमें ही लीन हो जाते हैं। ऐसा जानकर विद्वान् पुरुष आपके ही सान्निध्य को प्राप्त होता है ॥ 75॥
Just as its drops separate from water and after being diminished, with the passage of time they again merge with water and become one with it, similarly all beings are born from you and dissolve in you. A learned person knowing this attains your union. ॥ 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥