Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.201.74: शब्द और आकाश, स्पर्श और वायु, रूप और तेज, रस और जल, गन्ध और पृथ्वी ये सब आपसे उत्पन्न हुए हैं। काल, ब्रह्मा, वेद, ब्राह्मण और यह सम्पूर्ण चराचर जगत् आपसे उत्पन्न हुआ है॥ 74॥ | mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रूपं ज्योति: शब्द आकाशवायु:
स्पर्श: स्वाद्यं सलिलं गन्ध उर्वी।
कालो ब्रह्मा ब्रह्म च ब्राह्मणाश्च
त्वत्सम्भूतं स्थास्नु चरिष्णु चेदम्॥ ७४॥
अनुवाद
शब्द और आकाश, स्पर्श और वायु, रूप और तेज, रस और जल, गन्ध और पृथ्वी ये सब आपसे उत्पन्न हुए हैं। काल, ब्रह्मा, वेद, ब्राह्मण और यह सम्पूर्ण चराचर जगत् आपसे उत्पन्न हुआ है॥ 74॥
Sound and space, touch and air, form and light, taste and water, smell and earth have originated from you. Time, Brahma, Vedas, Brahmins and this entire animate and inanimate world have originated from you. ॥ 74॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥