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mahabharat 7.201.69: भगवान नारायण ने जगत् के रचयिता भगवान् की पूजा की, जो रुद्राक्ष की माला से सुशोभित थे और महिमा के परम स्रोत थे ॥69॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  7.201.69 
अक्षमालापरिक्षिप्तं ज्योतिषां परमं निधिम्।
ततो नारायणो दृष्ट्वा ववन्दे विश्वसम्भवम्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
भगवान नारायण ने जगत् के रचयिता भगवान् की पूजा की, जो रुद्राक्ष की माला से सुशोभित थे और महिमा के परम स्रोत थे ॥69॥
 
Lord Narayana worshiped the Creator of the Universe, who was adorned with the Rudraksha rosary and was the supreme source of glory. 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)