vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना
»
श्लोक 69
श्लोक
7.201.69
अक्षमालापरिक्षिप्तं ज्योतिषां परमं निधिम्।
ततो नारायणो दृष्ट्वा ववन्दे विश्वसम्भवम्॥ ६९॥
अनुवाद
भगवान नारायण ने जगत् के रचयिता भगवान् की पूजा की, जो रुद्राक्ष की माला से सुशोभित थे और महिमा के परम स्रोत थे ॥69॥
Lord Narayana worshiped the Creator of the Universe, who was adorned with the Rudraksha rosary and was the supreme source of glory. 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×