Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.201.63: रु' शब्द के कारण इन्हें रुद्र कहा गया है, जिसका अर्थ है दुःखों का हरण करने वाला। ब्रह्मा आदि जगत के रक्षकों में ये श्रेष्ठ हैं। ये पापों का नाश करने वाले, कल्याण करने वाले और जटाधारी हैं। ये सबको चेतना प्रदान करने वाले हैं और ये स्थावर-जंगम प्राणियों के परम कारण हैं। 63. | mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रु' शब्द के कारण इन्हें रुद्र कहा गया है, जिसका अर्थ है दुःखों का हरण करने वाला। ब्रह्मा आदि जगत के रक्षकों में ये श्रेष्ठ हैं। ये पापों का नाश करने वाले, कल्याण करने वाले और जटाधारी हैं। ये सबको चेतना प्रदान करने वाले हैं और ये स्थावर-जंगम प्राणियों के परम कारण हैं। 63.
He is called Rudra because of the word 'Ru' which means the remover of sorrow. He is the best among the protectors of the world like Brahma etc. He is the destroyer of sins, the one who brings welfare and has matted hair. He is the one who gives consciousness to everyone and he is the ultimate cause of the moving and immobile beings. 63.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥