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mahabharat 7.201.59: उन कमल-नेत्र भगवान हरि ने छियासठ हजार वर्षों तक केवल वायु पीकर अपना शरीर सुखाया।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  7.201.59 
षष्टिं वर्षसहस्राणि तावन्त्येव शतानि च।
अशोषयत् तदाऽऽत्मानं वायुभक्षोऽम्बुजेक्षण:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
उन कमल-नेत्र भगवान हरि ने छियासठ हजार वर्षों तक केवल वायु पीकर अपना शरीर सुखाया।
 
That lotus-eyed Lord Hari dried his body by drinking only air for sixty-six thousand years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)