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mahabharat 7.201.50: महर्षि! यह माया है या ईश्वर की इच्छा? मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि यह क्या है? यह अस्त्र मिथ्या कैसे हो गया? मुझसे क्या भूल हुई?॥50॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.201.50 
भो भो माया यदृच्छा वा न विद्म: किमिदं भवेत् ।
अस्त्रं त्विदं कथं मिथ्या मम कश्च व्यतिक्रम:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महर्षि! यह माया है या ईश्वर की इच्छा? मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि यह क्या है? यह अस्त्र मिथ्या कैसे हो गया? मुझसे क्या भूल हुई?॥50॥
 
‘Maharshi! Is this Maya or the will of God? I do not understand what this is? How did this weapon become false? What mistake did I commit?॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)