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mahabharat 7.201.5-6: आचार्यपुत्र! तुममें जो बल, विद्या, बल, पराक्रम, कौरवों के प्रति प्रेम और द्वेष है, वह सब मुझे दिखाओ। द्रोणाचार्य का वध करने वाला धृष्टद्युम्न तुम्हारा सारा अभिमान चूर-चूर कर देगा।॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  7.201.5-6 
या शक्तिर्यच्च विज्ञानं यद् वीर्यं यच्च पौरुषम्।
धार्तराष्ट्रेषु या प्रीतिर्द्वेषोऽस्मासु च यश्च ते॥ ५॥
यच्च भूयोऽस्ति तेजस्ते तत् सर्वं मयि दर्शय।
स एव द्रोणहन्ता ते दर्पं छेत्स्यति पार्षत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आचार्यपुत्र! तुममें जो बल, विद्या, बल, पराक्रम, कौरवों के प्रति प्रेम और द्वेष है, वह सब मुझे दिखाओ। द्रोणाचार्य का वध करने वाला धृष्टद्युम्न तुम्हारा सारा अभिमान चूर-चूर कर देगा।॥5-6॥
 
‘Acharyaputra! Show me all the power, knowledge, strength, valour, love for the Kauravas and hatred for us, along with the brilliance and influence you possess. That Dhrishtadyumna who killed Dronacharya will shatter all your pride.॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)