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mahabharat 7.201.45: माननीय महाराज! महात्मा श्रीकृष्ण और अर्जुन को आग्नेयास्त्र से मुक्त देखकर अश्वत्थामा को बड़ा दुःख हुआ। वह दो घण्टे तक इसी चिंता में डूबा रहा कि 'क्या हुआ?'॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.201.45 
विमुक्तौ च महात्मानौ दृष्ट्वा द्रौणि: सुदु:खित:।
मुहूर्तं चिन्तयामास किं त्वेतदिति मारिष॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! महात्मा श्रीकृष्ण और अर्जुन को आग्नेयास्त्र से मुक्त देखकर अश्वत्थामा को बड़ा दुःख हुआ। वह दो घण्टे तक इसी चिंता में डूबा रहा कि 'क्या हुआ?'॥ 45॥
 
Honorable King! Ashwatthama was very sad to see Mahatma Shri Krishna and Arjun free from the Agneyastra. He remained immersed in the worry for two hours that 'What has happened?'॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)