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mahabharat 7.201.43: दोनों सेनाओं को यह निश्चय हो गया कि श्रीकृष्ण और अर्जुन मर गए हैं। फिर उन दोनों को बड़े वेग से एक साथ आते देखकर सब लोग बहुत प्रसन्न हुए॥43॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.201.43 
हताविति तयोरासीत् सेनयोरुभयोर्मति:।
तरसाभ्यागतौ दृष्ट्वा सहितौ केशवार्जुनौ॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
दोनों सेनाओं को यह निश्चय हो गया कि श्रीकृष्ण और अर्जुन मर गए हैं। फिर उन दोनों को बड़े वेग से एक साथ आते देखकर सब लोग बहुत प्रसन्न हुए॥43॥
 
Both the armies were convinced that Shri Krishna and Arjuna were dead. Then, seeing them both approaching together at a great speed, everyone was very happy. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)