श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.201.42 
तत: किलकिलाशब्द: शङ्खभेरीस्वनै: सह।
पाण्डवानां प्रहृष्टानां क्षणेन समजायत॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तब पाण्डव हर्ष से भर गए और क्षण भर में ही उनका हर्षमय कोलाहल शंख और तुरही की ध्वनि से गूंज उठा ॥42॥
 
Then the Pandavas were filled with joy, and in a moment their joyous uproar resounded with the sound of conches and trumpets. ॥42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)