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mahabharat 7.201.40-41: उस समय गाण्डीवधारी अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के शरीर अक्षत थे। उनका रथ ध्वजा, ध्वजा, अश्व, अलंकरण और श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्रों से मुक्त होकर आपके सैनिकों को भयभीत करता हुआ चमक रहा था। ॥40-41॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  7.201.40-41 
ततो गाण्डीवधन्वा च केशवश्चाक्षतावुभौ॥ ४०॥
सपताकध्वजहय: सानुकर्षवरायुध:।
प्रबभौ स रथो मुक्तस्तावकानां भयंकर:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उस समय गाण्डीवधारी अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के शरीर अक्षत थे। उनका रथ ध्वजा, ध्वजा, अश्व, अलंकरण और श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्रों से मुक्त होकर आपके सैनिकों को भयभीत करता हुआ चमक रहा था। ॥40-41॥
 
At that time, the bodies of Arjuna and Lord Krishna, wielding the Gandiva, were unharmed. Their chariot, freed from its banner, flag, horse, adornment and the best of weapons, shone, frightening your soldiers. ॥ 40-41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)