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mahabharat 7.201.4: सव्यसाची अर्जुन तुरंत ही सिंह की पूँछ के समान चिन्ह वाली ध्वजा लेकर महाधनुर्धर अश्वत्थामा के पास आए और उनसे इस प्रकार बोले-॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.201.4 
ततो द्रुतमतिक्रम्य सिंहलाङ्गूलकेतनम्।
सव्यसाची महेष्वासमश्वत्थामानमब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सव्यसाची अर्जुन तुरंत ही सिंह की पूँछ के समान चिन्ह वाली ध्वजा लेकर महाधनुर्धर अश्वत्थामा के पास आए और उनसे इस प्रकार बोले-॥4॥
 
Savyasachi Arjuna immediately came to the great archer Ashvatthama, carrying a flag bearing the mark of a lion's tail, and spoke to him thus:॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)