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mahabharat 7.201.37-38h: फिर दो घण्टे में सारा अन्धकार दूर हो गया, शीतल वायु बहने लगी और सब दिशाएँ स्वच्छ हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.201.37-38h 
ततो मुहूर्तादिव तत् तमो व्युपशशाम ह॥ ३७॥
प्रववौ चानिल: शीतो दिशश्च विमला बभु:।
 
 
अनुवाद
फिर दो घण्टे में सारा अन्धकार दूर हो गया, शीतल वायु बहने लगी और सब दिशाएँ स्वच्छ हो गईं।
 
Then in two hours all the darkness disappeared, cool breeze started blowing and all directions became clean. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)