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mahabharat 7.201.36-37h: महाराज! उस समय अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र प्रकट किया, जिसे ब्रह्माजी ने समस्त अस्त्रों को नष्ट करने के लिए उत्पन्न किया था।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.201.36-37h 
अर्जुनस्तु महाराज ब्राह्ममस्त्रमुदैरयत्॥ ३६॥
सर्वास्त्रप्रतिघातार्थं विहितं पद्मयोनिना।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र प्रकट किया, जिसे ब्रह्माजी ने समस्त अस्त्रों को नष्ट करने के लिए उत्पन्न किया था।
 
Maharaj! At that time Arjuna revealed the Brahmastra, which was created by Brahmaji to destroy all the weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)