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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना
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श्लोक 35-36h
श्लोक
7.201.35-36h
नैव नस्तादृशं राजन् दृष्टपूर्वं न च श्रुतम्॥ ३५॥
यादृशं द्रोणपुत्रेण सृष्टमस्त्रममर्षिणा।
अनुवाद
हे राजन! द्रोणपुत्र द्वारा क्रोधवश बनाया गया ऐसा अस्त्र हमने न तो कभी देखा है और न ही सुना है।
O King! We have never seen or heard of such a weapon created by Drona's son out of anger. 35 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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