श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.201.34-35h 
कृत्स्ना ह्यक्षौहिणी राजन् सव्यसाची च पाण्डव:॥ ३४॥
तमसा संवृते लोके नादृश्यन्त महाहवे।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर ! उस महासमर में सब लोग अंधकार से आच्छादित थे। पाण्डवों की सम्पूर्ण अक्षौहिणी सेना तथा महाबुद्धिमान अर्जुन भी दिखाई नहीं दे रहे थे ॥34 1/2॥
 
Nareshwar! In that great battle everyone was covered with darkness. The entire Akshauhini army of the Pandavas and even the well-meaning Arjun were not visible. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)