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mahabharat 7.201.33-34h: तत्पश्चात् आपके सैनिक हर्ष से प्रफुल्लित होकर तथा विजय से विभूषित होकर हजारों प्रकार के वाद्य बजाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.201.33-34h 
ततस्तूर्यसहस्राणि नानालिङ्गानि भारत॥ ३३॥
तूर्णमाजघ्निरे हृष्टास्तावका जितकाशिन:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आपके सैनिक हर्ष से प्रफुल्लित होकर तथा विजय से विभूषित होकर हजारों प्रकार के वाद्य बजाने लगे।
 
Thereafter, your soldiers, elated with joy and adorned with victory, began playing thousands of different kinds of musical instruments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)