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mahabharat 7.201.32-33h: महाराज! उस महायुद्ध में पाण्डव सेना को जलता हुआ देखकर आपके सैनिक अत्यन्त प्रसन्न हुए और जोर-जोर से गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.201.32-33h 
दृष्ट्वा तु पाण्डवीं सेनां दह्यमानां महाहवे॥ ३२॥
प्रहृष्टास्तावका राजन् सिंहनादान् विनेदिरे।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस महायुद्ध में पाण्डव सेना को जलता हुआ देखकर आपके सैनिक अत्यन्त प्रसन्न हुए और जोर-जोर से गर्जना करने लगे।
 
King! Seeing the Pandava army burning in that great war your soldiers became very happy and started roaring loudly. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)