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mahabharat 7.201.28: वे विशाल हाथी जलकर बादलों की गर्जना के समान भयंकर चीखें निकालते हुए चारों ओर गिरने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.201.28 
दह्यमाना महानागा: पेतुरुर्व्यां समन्तत:।
नदन्तो भैरवान् नादाञ्जलदोपमनि:स्वनान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वे विशाल हाथी जलकर बादलों की गर्जना के समान भयंकर चीखें निकालते हुए चारों ओर गिरने लगे।
 
The huge elephants, being burnt, began falling on all sides while making terrifying shrieks, like the roar of the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)