vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना
»
श्लोक 27
श्लोक
7.201.27
तै: शरैर्द्रोणपुत्रस्य वज्रवेगै: समाहता:।
प्रदग्धा रिपव: पेतुरग्निदग्धा इव द्रुमा:॥ २७॥
अनुवाद
द्रोणपुत्र के उन वज्र के समान वेगवान बाणों से घायल होकर शत्रु सैनिक आग में जले हुए वृक्षों की भाँति जलकर गिर पड़े।
The enemy soldiers, wounded by those arrows of Drona's son which were as fast as thunderbolts, fell down burning like trees burnt in fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×