श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.201.26 
दिग्भ्य: प्रदिग्भ्य: खाद् भूमे: सर्वत: शरवृष्टय:।
उच्चावचा निपेतुर्वै गरुडानिलरंहस:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
आकाश और पृथ्वी, सब दिशाओं से छोटे-बड़े अनेक प्रकार के बाणों की वर्षा होने लगी; वे सब बाण गरुड़ और वायु के समान वेगवान थे॥26॥
 
There began a shower of various kinds of arrows, big and small, from all directions, the sky and the earth; all of these arrows were as swift as Garuda and the wind. ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)