Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.201.24: पृथ्वी पर रहने वाले सर्प भी उस अस्त्र के तेज से व्याकुल हो उठे और उस भयंकर अग्नि से छुटकारा पाने के लिए फुंफकारते हुए उछलने लगे। | mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वी पर रहने वाले सर्प भी उस अस्त्र के तेज से व्याकुल हो उठे और उस भयंकर अग्नि से छुटकारा पाने के लिए फुंफकारते हुए उछलने लगे।
Even the serpents residing on the earth became agitated by the brilliance of that weapon and began jumping up, hissing, to get rid of the dreadful fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥