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mahabharat 7.201.22: पक्षी और गौ आदि पशु भी त्राहि-त्राहि करने लगे। उत्तम व्रत का पालन करने वाले शुद्धचित्त ऋषिगण भी अत्यंत व्याकुल हो गए ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.201.22 
पक्षिण: पशवो गावो विनेदुश्चापि सुव्रता:।
परमं प्रयतात्मानो न शान्तिमुपलेभिरे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पक्षी और गौ आदि पशु भी त्राहि-त्राहि करने लगे। उत्तम व्रत का पालन करने वाले शुद्धचित्त ऋषिगण भी अत्यंत व्याकुल हो गए ॥22॥
 
Animals like birds and cows also started screaming. Even the pure minded sages who followed the best fast became extremely disturbed. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)