श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.201.21 
वायसाश्चापि चाक्रन्दन् दिक्षु सर्वासु भैरवम्।
रुधिरं चापि वर्षन्तो विनेदुस्तोयदा दिवि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कौए सब दिशाओं में काँव-काँव करके भयंकर कोलाहल मचाने लगे और आकाश में बादल गरजने लगे और रक्त की वर्षा करने लगे ॥21॥
 
The crows began to caw in all directions, creating a terrible uproar, and the clouds began to thunder in the sky, raining blood. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)