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mahabharat 7.201.20: राक्षस और पिशाच एक साथ जोर-जोर से दहाड़ने लगे, गर्म हवाएं चलने लगीं और सूर्य की गर्मी कम हो गई।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.201.20 
रक्षांसि च पिशाचाश्च विनेदुरतिसङ्गता:।
ववुश्चाशिशिरा वाता: सूर्यो नैव तताप च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राक्षस और पिशाच एक साथ जोर-जोर से दहाड़ने लगे, गर्म हवाएं चलने लगीं और सूर्य की गर्मी कम हो गई।
 
The demons and vampires began to roar loudly together, hot winds began to blow and the heat of the sun diminished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)