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mahabharat 7.201.2: हे मनुष्यों के स्वामी! श्रीकृष्ण और अर्जुन के रोकने के प्रयत्न करने पर भी वे सैनिक वहाँ टिक न सके।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.201.2 
ततस्ते सैनिका राजन् नैव तत्रावतस्थिरे।
संस्थाप्यमाना यत्नेन गोविन्देनार्जुनेन च॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! श्रीकृष्ण और अर्जुन के रोकने के प्रयत्न करने पर भी वे सैनिक वहाँ टिक न सके।
 
O Lord of men! In spite of Shri Krishna and Arjuna's efforts to stop them, those soldiers could not stand there. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)