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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना
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श्लोक 19
श्लोक
7.201.19
उल्काश्च गगनात् पेतुर्दिशश्च न चकाशिरे।
तमश्च सहसा रौद्रं चमूमवततार ताम्॥ १९॥
अनुवाद
आकाश से उल्काएँ गिरने लगीं, सम्पूर्ण दिशाओं का प्रकाश लुप्त हो गया और सेना पर सहसा भयंकर अंधकार छा गया॥19॥
Meteors began falling from the sky, the light of all directions vanished and a terrible darkness suddenly descended upon the army.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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