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mahabharat 7.200.98-99h: हे मनुष्यों के स्वामी! दो घण्टे के अन्दर ही अश्वत्थामा को होश आ गया, वह रक्त से लथपथ हो गया और युद्धभूमि में अत्यन्त क्रोध प्रकट करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 98-99h
 
 
श्लोक  7.200.98-99h 
स मुहूर्तात् पुन: संज्ञां लब्ध्वा द्रौणिर्नराधिप॥ ९८॥
क्रोधं परममातस्थौ समरे रुधिरोक्षित:।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! दो घण्टे के अन्दर ही अश्वत्थामा को होश आ गया, वह रक्त से लथपथ हो गया और युद्धभूमि में अत्यन्त क्रोध प्रकट करने लगा।
 
O lord of men! Within two hours Ashwatthama regained his consciousness and was covered in blood and showed extreme anger in the battle-field. 98 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)