| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन » श्लोक 92-93h |
|
| | | | श्लोक 7.200.92-93h  | भीमनामाङ्किता बाणा: स्वर्णपुङ्खा: शिलाशिता:॥ ९२॥
द्रौणिं संछादयामासुर्घनौघा इव भास्करम्। | | | | | | अनुवाद | | जिस प्रकार बादल सूर्य को ढक लेते हैं, उसी प्रकार भीमसेन के नाम से अंकित तथा सान पर तीखे किए गए स्वर्ण पंखयुक्त बाणों ने द्रोणपुत्र को ढक लिया। | | | | Just as clouds cover the Sun, similarly the golden-feathered arrows, inscribed with Bhimasena's name and sharpened on a whetstone, covered Drona's son. | | ✨ ai-generated | | |
|
|