श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 90-91h
 
 
श्लोक  7.200.90-91h 
तदपास्य धनुश्छिन्नं द्रोणपुत्रो महामना:॥ ९०॥
अन्यत् कार्मुकमादाय भीमं विव्याध पत्रिभि:।
 
 
अनुवाद
इसके बाद महाहृदयी द्रोणपुत्र ने टूटा हुआ धनुष फेंक दिया और दूसरा धनुष लेकर भीमसेन पर अनेक बाण चलाये।
 
After this, the great-hearted son of Drona threw away the broken bow and took up another bow and shot many arrows at Bhimasena. 90 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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