vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन
»
श्लोक 90-91h
श्लोक
7.200.90-91h
तदपास्य धनुश्छिन्नं द्रोणपुत्रो महामना:॥ ९०॥
अन्यत् कार्मुकमादाय भीमं विव्याध पत्रिभि:।
अनुवाद
इसके बाद महाहृदयी द्रोणपुत्र ने टूटा हुआ धनुष फेंक दिया और दूसरा धनुष लेकर भीमसेन पर अनेक बाण चलाये।
After this, the great-hearted son of Drona threw away the broken bow and took up another bow and shot many arrows at Bhimasena. 90 1/2.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas