Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.87-88h: तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भीमसेन ने क्रोध में भरकर युद्धस्थल में विषैले सर्पों के समान तीखे सैकड़ों बाणों से द्रोणपुत्र अश्वत्थामा को आच्छादित कर दिया। | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भीमसेन ने क्रोध में भरकर युद्धस्थल में विषैले सर्पों के समान तीखे सैकड़ों बाणों से द्रोणपुत्र अश्वत्थामा को आच्छादित कर दिया।
Then Bhimasena, the tormentor of enemies, filled with anger, covered Drona's son Ashwatthama in the battlefield with hundreds of sharp arrows, like poisonous serpents. 87 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥